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सच्चाई का गला घोंटती ‘कॉपी-पेस्ट’ पत्रकारिता: जब मीडिया ही बन जाए नेताओं-अफसरों की ‘फोटोकॉपी मशीन’, तो कौन उठाएगा जनता की आवाज़?

व्हाट्सएप ग्रुप्स से हेडलाइन तय करने वाले दौर में खो गई जमीनी पड़ताल; सच लिखने वालों को दबाने की हो रही साज़िश, ‘आपकी आवाज़’ का बड़ा वैचारिक प्रहार!

गाडरवारा/नरसिंहपुर (विशेष संपादकीय):
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाला मीडिया आज एक बेहद खतरनाक दौर से गुजर रहा है। कभी पत्रकारिता का मतलब खबरों की तह तक जाना, अधिकारियों की आंखों में आंखें डालकर तीखे सवाल पूछना और छिपाई जा रही सच्चाई को बेनकाब करना होता था। लेकिन आज गाडरवारा से लेकर पूरे देश में पत्रकारिता का स्तर गिरकर महज एक ‘फोटोकॉपी मशीन’ जैसा हो गया है। रसूखदार नेता और बड़े अधिकारी जो चाहते हैं, मीडिया में ठीक वही परोसा जा रहा है। व्यवस्था के दफ्तरों से जो कागज निकलता है, वही बिना किसी फेरबदल के अखबारों के पन्नों और न्यूज पोर्टल्स की सुर्खियां बन जाता है।

व्हाट्सएप ग्रुप्स बने ‘खबरों की मंडी’, पड़ताल का हुआ अंत

आजकल की पत्रकारिता फील्ड की धूल फांकने से नहीं, बल्कि बंद कमरों में व्हाट्सएप ग्रुप्स खंगालने से चल रही है। किसी विभाग के ग्रुप में एक फोटो और दो लाइन का सरकारी दावा डाल दिया जाता है, और चंद मिनटों में वही सरकारी गुणगान सोशल मीडिया पर ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बनकर तैरने लगता है। पहले एक छोटी सी खबर के लिए भी पत्रकार हर पहलू की पड़ताल करते थे, गवाहों से बात करते थे और हर दावे की सच्चाई को कसौटी पर कसते थे। लेकिन आज सवाल-जवाब की यह परंपरा पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। अधिकारियों के झूठ को ही सच मानकर छापना आज के नए जमाने के पत्रकारों की मजबूरी या आदत बन चुका है।

सच दिखाने की सोचो, तो दबा दी जाती है ‘आवाज़’!

इस ‘कॉपी-पेस्ट’ के दौर में अगर कोई ईमानदार पत्रकार इस सरकारी ढर्रे के खिलाफ जाने की हिम्मत करता है, अगर कोई खबरों की पड़ताल करके असली चेहरे को बेनकाब करने की सोचता है, तो तुरंत तंत्र सक्रिय हो जाता है। सच लिखने वाले पत्रकारों की आवाज को दबाने के लिए हर हथकंडा अपनाया जाता है— कभी सरकारी विज्ञापनों को रोकने की धमकी दी जाती है, तो कभी झूठे मुकदमों और रसूख का खौफ दिखाया जाता है। मकसद सिर्फ एक है— मीडिया को अपना ‘गुलाम’ बनाकर रखना, ताकि जनता तक कभी वो सच पहुंच ही न पाए जिसे रसूखदार दबाना चाहते हैं।

‘आपकी आवाज़’ झुकेगी नहीं, हर झूठ को बेनकाब करेगी

नेताओं और अफसरों के दावों को हूबहू ‘प्रिंट आउट’ की तरह छाप देना पत्रकारिता नहीं, बल्कि जनता के साथ धोखा है। जब मीडिया ही अधिकारियों का पीआर (PR) एजेंट बन जाएगा, तो पीड़ित आम आदमी अपनी गुहार लेकर कहां जाएगा?

‘आपकी आवाज़’ न्यूज़ नेटवर्क इस ‘फोटोकॉपी’ वाली पत्रकारिता को सिरे से खारिज करता है। हमारा संकल्प गाडरवारा और नरसिंहपुर की जनता के प्रति है, न कि किसी बंद कमरे में बैठने वाले अधिकारी या रसूखदार नेता के प्रति। आवाज दबाने की हर कोशिश के बावजूद, हम खबरों की पड़ताल भी करेंगे, सत्ता से तीखे सवाल भी पूछेंगे और जनता की अदालत में सच को लाकर ही दम लेंगे। क्योंकि हम ‘कॉपी-पेस्ट’ मशीन नहीं, हम जनता की असली ‘आवाज़’ हैं!

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