विशेष संवाददाता, राष्ट्रीय सर्राफा बाजार
देशभर में शादियों का सीजन आते ही कीमती धातुओं की कीमतों में लगी आग ने आम जनता के पसीने छुड़ा दिए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹1,50,000 प्रति 10 gram के पार बना हुआ है। वहीं, चांदी भी ₹2,47,000 प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रही है। भारतीय परिवारों में बिना सोने-चांदी के शादी की कल्पना भी असंभव मानी जाती है, लेकिन इस अभूतपूर्व महंगाई ने अमीर से लेकर गरीब तक, हर वर्ग का वित्तीय गणित बिगाड़ दिया है।
प्रमुख झलकियां (News Highlights)
📌 बजट में भारी कटौती: मध्यमवर्गीय परिवारों ने सामाजिक दबाव के कारण गहनों का वजन घटाकर अब केवल 2 से 3 तोले तक सीमित कर दिया है।
📌 कर्ज का बढ़ा बोझ: गरीब तबके के लोग समाज में प्रतिष्ठा बचाने और बेटी की शादी की रस्म पूरी करने के लिए अपनी जमीन और घर गिरवी रख रहे हैं।
📌 लाइटवेट और 1-ग्राम ज्वेलरी का ट्रेंड: सर्राफा बाजारों में असली भारी आभूषणों की जगह अब सोने की परत चढ़े (1-Gram Gold) और कम वजन वाले गहनों की मांग 60% तक बढ़ी है।
📌 पुराने सोने का बढ़ता एक्सचेंज: लोग नए गहने खरीदने के बजाय घरों में रखे पुश्तैनी और पुराने सोने को पिघलाकर नए डिजाइन बनवा रहे हैं।
📌 उपहारों का बदला स्वरूप: शादियों में रिश्तेदारों द्वारा दिए जाने वाले चांदी के सिक्के या बर्तन अब पूरी तरह बंद हो चुके हैं, उनकी जगह अब नकद लिफाफे दिए जा रहे हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण: रस्मों के तरीके बदलने की जरूरत
समाजशास्त्रियों का कहना है कि अब समय आ गया है जब हर समाज और वर्ग को विवाह के पारंपरिक पैमानों को बदलना होगा। शादियों में भारी-भरकम सोने का दिखावा करने के बजाय बेटियों की शिक्षा और उनके आत्मनिर्भर भविष्य पर निवेश करना ज्यादा समझदारी भरा कदम होगा, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग को कर्ज के दलदल में फंसने से बचाया जा सके।
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