🚨 सुलगता सवाल: गाडरवारा की सड़कों पर ‘सॉल्यूशन’ सूंघकर दम तोड़ता बचपन; रसूखदार ‘नशा माफिया’ मस्त, रबर की तरह खिंचता कानून पस्त!गाडरवारा/नरसिंहपुर।हाथ में कपड़ा, कपड़े पर लगा नशीला रासायनिक पदार्थ (सॉल्यूशन/सुलोचन), और उस कपड़े को नाक से सटाकर मदहोश कदमों से गाडरवारा की सड़कों पर भटकते ये मासूम बच्चे… यह किसी डरावनी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि गाडरवारा के व्यस्ततम ‘शहीद चौक’ (आकाश मोबाइल शॉप के सामने) की वो कड़वी और डरावनी हकीकत है, जिससे पूरा प्रशासनिक अमला रोजाना आंखें मूंदे गुजर जाता है। जिन हाथों में स्लेट-पेेंसिल और किताबें होनी चाहिए थीं, उन नन्हे हाथों में आज मौत का सामान थमा दिया गया है।🛑 भूख मिटाने के लिए जन्म से ही बना दिया ‘नशे का आदी’इन बेसहारा और मासूम नौनिहालों को चौबीस घंटे नशे की हालत में रखने के पीछे एक बेहद खौफनाक और अमानवीय सिंडिकेट काम कर रहा है। सूत्रों की मानें तो इन बच्चों को भूख, प्यास या सर्दी-गर्मी का अहसास न हो, इसलिए इन्हें बचपन से ही इस घातक केमिकल का आदी बना दिया जाता है। भूखे-प्यासे ये बच्चे दिन-भर सड़कों पर सिर्फ इसलिए भटकते हैं ताकि चंद रुपये भीख मांगकर या कबाड़ बीनकर जुटा सकें, जिससे इनके अगले डोज का इंतजाम हो सके। यह सीधे तौर पर इन मासूमों के मानवाधिकारों का हनन और प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत है।❓ कानून की कसम खाने वाले जिम्मेदार ‘कलेक्टर’ और बाल कल्याण विभाग क्यों मौन?कानून की किताबों में ऐसे अनाथ और भटके हुए बच्चों के पुनर्वास, पढ़ाई-लिखाई और मुख्यधारा में लाने के लिए कड़े नियम बने हैं। ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट’ (JJ Act) के तहत इन बच्चों को सुरक्षित वातावरण और नशामुक्ति केंद्र भेजने की सीधी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर और बाल कल्याण समिति (CWC) की होती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि:जिला प्रशासन और महिला बाल विकास विभाग की नजर इन नौनिहालों पर क्यों नहीं पड़ती?इन्हें इस दलदल से निकालकर स्कूल भेजने के गंभीर प्रयास धरातल पर क्यों नहीं दिखते?क्या सिर्फ कागजों पर ‘बाल संरक्षण सप्ताह’ मनाकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ चुका है?⚡ स्मैक, गांजा और पाउडर की गिरफ्त में नरसिंहपुर जिलायह स्थिति केवल सॉल्यूशन सूंघने वाले बच्चों तक सीमित नहीं है। इन दिनों पूरा नरसिंहपुर जिला नशा माफियाओं की गिरफ्त में आ चुका है। गाडरवारा सहित जिले के कोने-कोने में स्मैक (पाउडर), अवैध शराब और गांजे का कारोबार चरम पर है। युवा पीढ़ी इस जहर की दलदल में तेजी से धंस रही है। गली-मोहल्लों में सरेआम नशीले पदार्थ बिक रहे हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग केवल ‘छोटे मोहरों’ पर दिखावटी कार्रवाई कर बड़े माफियाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण दे रहा है।⚠️ समय रहते नहीं चेते, तो पछताएगा समाजतस्वीर में दिख रहे बच्चों की आंखों का सूनापन और नाक पर लिपटी नशीली थैली गाडरवारा के जागरूक नागरिकों और प्रशासन के गाल पर एक करारा तमाचा है। यदि जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने इन मासूमों के पुनर्वास और जिले के नशा माफियाओं पर ‘बुलडोजर’ जैसी सख्त कार्रवाई नहीं की, तो गाडरवारा का भविष्य सड़कों पर दम तोड़ देगा।
